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बात जब सुदूर रेत के धोरों के बीच स्थित गावों की हो तो, आधुनिक और भौतिक सुख सुविधाएँ बेमानी लगती है|
स्थानीय संसाधनों से निर्मित कुटीर और उस पर रंगोली-मांडना बरबस ही ध्यान आकर्षित कर लेता है |

वाह ... क्या भाव और कला का संयोजन है !

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