राजस्थान का सुदूर पश्चिमी इलाका, रेत के समंदर के बीच लू के थपेड़े झेलता मारवाड़, थार मरूस्थल के चमकीली बालू के रेतीले धोरों की छाती पर सूर्य की प्रचण्ड किरणों के प्रहार से तिलमिलाते रेगिस्तान की फुफकार के आगे हर कोई बेबस हो जाए | हमेशा अभावो में जीने वाले मारवाड़ के मेहनतकश लोगों के हृदय कितने विशाल है ये बात यहाँ पर बाहर से आने वाले मेहमान ही जानते होंगे| इसी मारवाड़ के तपते रेगिस्तान में पनपती मारवाड़ी सांस्कृतिक परम्पराएं, मिठास से लबरेज़ मारवाड़ी भाषा, शालीन पहनावा, अनूठे तीज-त्यौहार, दिलकश रीति-रिवाज़, लोक लुभावन मेले, ऐतिहासिक धरोहर, हर किसी के दिल की गहराईयों को छूने के लिए काफी है|
मारवाड़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत का संक्षिप्त अवलोकन देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करना ही इस ब्लॉग का एक मात्र उद्देश्य है| कुछ आँखों देखी निजी अनुभूत, कुछ बड़े बुजुर्गों से सुनी सुनायी, कुछ साहित्यिक-सांस्कृतिक उद्दृत दृश्य-श्रव्य उद्धरण प्रस्तुत कर मारवाड़ की वास्तविक सुन्दर झांकी दिखाने का एक संक्षिप्त प्रयास|
मारवाड़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत का संक्षिप्त अवलोकन देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करना ही इस ब्लॉग का एक मात्र उद्देश्य है| कुछ आँखों देखी निजी अनुभूत, कुछ बड़े बुजुर्गों से सुनी सुनायी, कुछ साहित्यिक-सांस्कृतिक उद्दृत दृश्य-श्रव्य उद्धरण प्रस्तुत कर मारवाड़ की वास्तविक सुन्दर झांकी दिखाने का एक संक्षिप्त प्रयास|


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